बहाने बहुत हैं

ज़िन्दगी के पहलु बहुत हैं , हर पहलु हर मोड़ पे खुशियां और गम बहुत हैं .
यूँ तोः मिले हमसफ़र बेशुमार , तू है तोः मुस्कुराने गुनगुनाने के बहाने बहुत हैं .

उम्र के साथ कई मक़ाम गुज़रे , नए शहर देखे नए दोस्त मिले ,
कुछ साथी बने , कुछ छूटे , कुछ नए सपने बने ,कुछ टूटे .

चल पड़े मंज़िलों की तरफ ,
नयी राह पे ,
कई मील के पत्थर देखे ,
काली अँधेरी रातों में टिमटिमाते सितारे देखे .

नयी सुबह की नर्म सूरज की गर्मी का एहसास किया ,
नम मिटटी की सोंधी खुशबू में घुल के ज़िंदादिली में अपने आप को ढाल लिया .

चिलचिलाती धुप में , पसीने में तर , ठंडी छाँव का इंतज़ार किया .
कभी अकेली मैं रोती सिमट के अपने आप में ,
कभी पाँव न थमते ज़मीन पर , खुशियों के अहसास में .

हसरतें हुई पूरी कभी ,थोड़े कम थोड़े ज़्यादा ,
मकसद नज़र आती सामने तो ,
कभी लगता , इस सब का क्या फायदा .

एक घर एक परिवार कई ज़िंदगियाँ जुडी ,
दिन महीने साल निकले , राहें मुड़ी .

दौड़ में भागते रहे सुबह से शाम ,
रुक कर , थम कर न पीछे देखा , बस दिखते काम के बाद काम .

तभी घनी धुंध से निकली कुछ भूली बिसरी यादें ,
बचपन की मस्ती भरे दिनों की वह बातें .

अब है नया जोश , उमीदें बहुत हैं ,
यूँ तोः मिले हमसफ़र बेशुमार , तेरे आने से खिलखिलाने के बहाने बहुत हैं .

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