मोहब्बत फरमाया करते थे…..

वक्त एसा था हम भी मोहब्बत फरमाया करते थे
उनकी जुल्फो के साये मे अक्सर सो जाया करते थे
उनकी अस्को पर तो बादल भी बरस जाता था
उन्हे हसाने के लिये हम जोकर बन जाया करते थे

कभी उन्हे याद कर के सपनो मे खो जाया करते थे
तो कभी हम खुद से खफा हो जाया करते थे
हसते तो वो भी थे हम पर गैरो कि तरह
तो क्यु लोग उसके नाम से हमे चीढाया करते थे

[ फ्रक बस इतना था मेरे दोस्त
तब वो जान कर मेरा दिल जलाया करते थे
और हम जल कर भी मुस्कुराया करते थे ]

वो जाते जाते भी ख्वाबो मे आया करते थे
दर्द बन कर दिल को बहलाया करते थे
चोट पर मरहम लगाने की बात तो अलग है
वो तो जख्म पर भी जख्म दे जाया करते थे

अब मोहब्बत मे ये कैसी दुरी है
मै यहा अधुरा हु वो वहा अधुरी है……

Leave a Reply