।। सच का भुगतान ।। कविता ।

।।सच का भुगतान ।।

झूठ और सच पता लगाना
है कितना दुस्वार
सच्चाई का नही दिख रहा
अब कोई आसार
भौतिकता में
स्वार्थपरकता
का करना होगा अनुदान ।।
तब होगा सच का भुगतान ।।1।।

क्योकि इस मोबाइल युग में
इंटरनेट के नाते
होते होते बड़ी हो गयी
छोटी छोटी बाते
इन बातो को
बस हृदय से
अब करना है तुम्हे मिलान ।।
तब होगा सच का भुगतान ।। 2।।

एक झूठ ही सारे सच को
कर देता है झूठा
एक सत्य पर सिर्फ अकेले
रचता दृश्य अनूठा
इस प्रकाश में
मिट जायेगा
झूठो की वह झूठी शान ।।
तब होगा सच का भुगतान ।।3।।

सत्य अटल है अडिग रहा है
निर्भय है बलसाली
सत्य उजाले सा प्रभावी
झूठी रात है काली
अंध हृदय में
सच के दीपक
का करके देखो सन्धान ।।
तब होगा सच का भुगतान ।।4।।

झूठ बोलना नही रही है
कभी भी अच्छी बात
असहनीय यह कर जाती है
हृदय पर आघात
जीवन से है
इसे मिटाना
बन करके कोई इंसान ।।
तब होगा सच का भुगतान ।।5।।

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