अपना-पराया

अपना-पराया

किसे पत्ता नजरें लगे मुसीबतों को
तुझे पत्ता अपनें होते खून की प्यासे |

जलते सदा वो तरक्की करें तो तू
फेंकते जाल वो सड़ती रहें सदा तू |

चाहते सब सुख वो दुनियाभर की
ठहरे और सब दुनियांदारी में ही |

होता सब अपना-पराया अपनापन से
खोता सबकुछ जख्म होता जब दिल पे |

वक्त बुरा नहीं होता नियत साफ हो तो
इल्जाम बड़ी गुनाह होता बेवजह दे तो |

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