स्वागत है नयें वर्ष

स्वागत है नयें वर्ष
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समझो हर साल सालों में समा गए
बचपन कब मारा अपने हाथों अपना तू
यौवनका मस्ती कब भुला बढ़े उम्र में तू
नयें रंग नयें ढंग को बुराहाल करता क्यूँ तू
जीने की ढंग बदलो,देखने की नजरें बदलो
गुजरे कलको एहसान मानो,स्वागत कलको
क्या छूटा पास ही तू है अपने पास सबकुछ
ग़लतफ़हमी है सबको हर सालसे टकराते तू
नए साल नयें अंदाज यही तो है हमारे साथ |

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