पीलाना जरुरी है

आँख मे आसु नही अंगार होना जरुरी है
गगन चुमती इमारतो का ढहना जरुरी है
इससे पहले की अत्याचार की बहने लगे हवा
दिप तेरे खयालो का जलना जरुरी है

खीलती कलीयों को सूरज मिलना जरुरी है
शाखाओ मे उफनता लहू बहना जरुरी है
इससे पहले की तक्षशिला और नालंदा को आग लगा दे कोई
बादल तेरे खयालो का बरसना जरुरी है

गुलामी को मन से हटाना जरुरी है
बगावतो को फिर से दहाडना जरुरी है
इससे पहले की सूरज ढाकले कोई बादल
धुआँ हर एक सीने से उठना जरुरी है

मनभेदो का हिलना जरुरी है
अपने हक का एहसास होना जरुरी है
ईस से पहले की मानव बन जाये पशु
दवा इन्सान को इन्सानियत की पीलाना जरुरी है

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