मिटने दो काल

समझो कयामत की चाल
छोड दो मुसिबत के जाल
बहक जाने दो सधे हुये पाँव
चुकता है तो चुकने दो ताल

मचलने दो सागर जैसे हाल
खरीदना मत बिकता हुआ माल
जलता नही बस निखर जाने दो
गुजरते है तो गुजरने दो साल

तुफाँ से निकलने दो खाल
ना बचे तो ना बचे तील और गाल
जलते को जरा बुझालो कभी
मिटता है तो मिटने दो काल

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