दुलार देता है कोई

प्यारा नही फिर ,दुलार देता है कोयी
सासे जीवन की ,मुझसे लेता है कोयी

बाहो के घेरोसे लिपटता है कोयी
तन्हाई मे मुझसे सिमटता कोयी
हर पल है जीना ,मौत से बेखबर
पास भगवन मेरे ,बैठता है कोयी

भुजाओ को मेरे छाटता है कोयी
अस्थीयो को मेरे काटता है कोयी
औरो के लीए मरना, यही है जीना
जीतेजी अंग मेरे बाटता है कोयी

चारा हु मै मुझपे पलता है कोयी
देखकर मुझे राह चलता है कोयी
राख मेरे बिना तेरी ,होने न पाये
मृतको के संग जलाता है कोयी

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