दम लिया-गजल-शिवचरण दास

दोस्ती का हक निभाकर दम लिया
रिश्ते नातों को भुलाकर दम लिया.

सारी दुनिया की सजा हमको मिली
बेकसी ने घर जलाकर दम लिया.

रोशनी के वास्ते जो लड रहा था
उस दिये को भी बुझाकर दम लिया.

आज मिलने से भी लोग कतराने लगे
सबकी नजरों मे गिराकर दम लिया.

बेसबब तकरार करके क्या मिला
राह में काटें सजाकर दम लिया.

जब भी खुद से आदमी लडने लगा
दर्द ने उसको हराकर दम लिया .

मौत से बैकौफ जिन्दगी से क्या डरें
हमने गर्दिश को मिटाकर दम लिया .

कौन समझे गैर के दर्द की गहराईयां
हर किसी ने मुस्कराकर दम लिया.

दास आखिर फैसला है खुदा के हाथ में
किसने किस को कब गिराकर दम लिया.

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