नव वर्ष

आओ कुछ ऐसे नव वर्ष मनाये
बीते लम्हों को करे विदा ख़ुशी – २
आने वाले पलो संग जश्न मनाये
आओ कुछ ऐसे नव वर्ष मनाये

बीता कल जैसा था अब बीत गया
खामियों की उस से कुछ सबक ले
आगंतुक पल को अपना शस्त्र बनाये
आओे कुछ इस तरह नव वर्ष मनाये

वक़्त जो छूट गया पीछे रोना क्या
जो आया न हाथ अपने खोना क्या
करे संकल्प, स्वयं को सुदृढ बनाये
आओे कुछ इस तरह नव वर्ष मनाये

बुराई उसमे भी कुछ न थी गर परखो
अब तक जो भी मिला कम न समझो
पाने को और ज्यादा नए लक्ष्य बनाये
आओे कुछ इस तरह नव वर्ष मनाये

गलती बुरी नहीं होती गर ले सबक
उनसे, फिर न उनको दोहराया जाए
अभी है अवसर सवारने का खुद को
हो सजग हम, ऐसा प्रयोजन बनाये
आओ कुछ इस तरह नव वर्ष मनाये

गुजरता है हर कोई हर एक दौर से
प्रकृति का नियम इससे कैसे मुँह छुपाये
करे सुअवसर का सदुपयोग सर्वथा
करे अमल जो उसे, दुनिया शीश झुकाये
आओ कुछ इस तरह नव वर्ष मनाये

डी. के. निवातियाँ

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