टेररिज्म…

मार रहे हो मासूमों को,
कुछ तो शर्म करो!
अपने धर्म को देखो,
थोड़ा अध्ययन करो!
किधर है चिन्हित तुम्हारे इरादे,
कि मौत के घाट बच्चों को उतारे!
किधर लिखा है किसी आखर में,
सबला को बेवा बनवा दे!
अगर धर्म को जान चाहिए,
तो खुद को पहले बलि चढ़ा दे!
मासूमों की लाशों पे चलकर,
तू जन्नत क्या नरक भी न पावे !

जब कभी ज़मी को देखता होगा खुदा,
रोके उसकी आँखों से गिरती होगी हया !
कि क्या बनाया था उसने और क्या बन गए हम,
अन्धकार को दिल में जीवित करके खुद मृत हो गए हम !