लड़कियां

तुम सब गुलदस्ते में लगे हुए फूल हो
जिनकी पंखुरियों के झरने में
छिपा होता है कहर
जिनकी खुशबुओं से महकता है शहर
तुम सब मस्त हवा हो
जसकी थकन में भी
अभिनव उड़ान होती है
जिसके चलने से
राहें जवान रहती हैं
तुम सब कारवां हो
जिसका अच्छा लगता है
बस गुज़रना
जिसका धर्म नहीं है ठहरना
तुम सब पहचान हो
जिसका होना आम है
मगर टूटना अंजाम है
तुम सब सुर्खियां हो
जिससे हर रोज़
कोई रहता है घिरा
कोई भी
कोई नादान
या सिरफिरा

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