अंदाज़ ही कुछ ऐसा है!!

ज़ख्म देकर मरहम लगाने का उनका,
अंदाज़ भी अलग सा है!

दर्द के सौगातों को, लबों पे सजाने का उनका,
अंदाज़ भी अलग सा है!

खामोश रहकर भी, सब कह जाने का उनका,
अंदाज़ भी अलग सा है!

उफ़नती लहरों से अरमां, और गहरे सागर से,
इस नादाँ दिल के, एहसास हो गए हैं!

दिल देकर दिल तोड़ जाने का उनका,
अंदाज़ ही कुछ ऐसा है!!

-श्रेया आनंद
(7th April, 2014)

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