मेरा वजूद तुमसे है!

जानते नहीं की तुम कौन हो,
लेकिन मेरा वजूद तुमसे है!
तुम साथ नहीं मेरे फिर भी,
हर-पल तुम्हें महसूस करते हैं!
आईने में देख जब झुकतीं हैं पलकें ये,
लगता है इन आँखों का नूर तुमसे है!
जानते नहीं की तुम कौन हो,
लेकिन मेरा वजूद तुमसे है!

तसव्वुर में अक्सर तेरे अक्स से,
रु-बरु होते हैं!
तेरे ख्यालों में बे-सुध होकर,
हवाओं से गुफ़तगू करते हैं!
जानते नहीं की तुम कौन हो,
लेकिन मेरा वजूद तुमसे है!
-श्रेया आनंद
(28th Nov, 2014)

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