शायर हूँ मैं!!

ता-ज़िन्दगी मोहब्बत को,
समझने कि कोशिश की !
एक शायर हूँ मैं,
शायरी में इसे संजोने की कोशिश की !
अजब कहानी है, ऐ मोहब्बत तेरी ! कैसे कहूं ?

आज एहसास है,
कोई हमारा भी ख़ास है !

जब उठाती हूँ कागज़-कलम,
लिखने को अपने दिल की सदा,
शब्द आसमां, ये एहसास जमीं से हो जाते हैं !
जो मिल कर भी कभी, मिल न पाते हैं !

आलम-ऐ-दिल, जाने कितनो की, लिखी है मैंने,
आज अपने ही दिल का हाल, लिख न पाते हैं !!
-श्रेया आनंद
(27th Dec 2013)

2 Comments

  1. Ajay Kumar Ajay Kumar 29/12/2014
    • Shreya Anand Shreya Anand 31/12/2014

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