एक धुंधली सी शाम है, एक रौशन सवेरा है !

एक धुंधली सी शाम है,
एक रौशन सवेरा है !
जो देखती हूँ मैं, दिल में झांककर अपने,
आज भी धड़कनों की तखत पर,
तेरी यादों का पहरा है !

नाकाम होतीं हैं,
मेरी तमाम कोशिशें,
फिर टूट-टूट आरजू मेरी,
कहती हैं मुझसे ये,
तेरे दिल से मेरे दिल का,
रिश्ता गहरा है !

मैं चाहती हूँ तुझे आज भी,
उतनी ही शिद्दत से,
अब भी तेरे ख़वाबों से, मेरी नींदो का,
नाता सुनहरा है !

एक धुंधली सी शाम है,
एक रौशन सवेरा है !

ख्वाहिशो की दुनिया पे,
कहाँ सच-झूठ का सेहरा है !

एक धुंधली सी शाम है,
एक रौशन सवेरा है !
-श्रेया आनंद
(13th Dec 2013)

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