तेरे आसूं मिटा न पाएं !!

कभी जो लौट पाते हम, ख़ुदा के वतन से,
ओढ़ा खुशियों का आँचल तुझे, चुरा लेते नमीं, पलकों कि चिलमन से !
हैं किस कदर बेबस और लाचार हम, ऐ जान-ए-वफ़ा तुझे कैसे बतायें,
हैं तेरे पास भी, तेरे साथ भी, फिर भी तेरे आसूं मिटा न पाएं !!
-श्रेया आनंद
(17th Nov 2013)

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