आलम-ए-दिल कह जाते हैं !!

जो बात हम लबों से कह नहीं पाते,
उन्हें स्याही से कागज पर लिख देते हैं!
अक्सर वो महज़ अलफ़ाज़ लगते हैं,
ग़र हम उन चुनिंदा शब्दों में,
आलम-ए-दिल कह जाते हैं !!
– श्रेया आनंद
(27 July 2013

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