ज़िन्दगी को अपनाने चली !!

यादों की गठरी पर,
आसुओं की चादर चढ़ा कर,
खिलखिलाते लबों से,
दर्द का हर नगमा छुपा कर,
चुनिंदा खुशनशी लम्हों को,
पलकों के आशियाने में सजा कर,
फैला कर ये बाहें अपनी,
ज़िन्दगी को अपनाने चली !!

– श्रेया आनंद
(22nd July 2013)

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