वो लम्हें याद आते हैं…

ज़िन्दगी के बीते अनगिनत लम्हें,
यादों के शामियाने से,
कुछ यूँ याद आते हैं,
लबों पे एक भीनी सी मुस्कान,
पलकों तले थमी नमी,
चेहरे की शुर्खियों पर,
एक साथ नजर आते हैं !

धुंधली सी पड़ गई, वो तस्वीरे,
जिसे बरसो से संजो के रखा था,
साए की तरह आँखों के,
सामने आ जाते हैं !
खामोश गमगीं से उस पल में,
किसी की अपनी सी आवाज,
कही दूर से पुकारती लगती है !
बेचैन सी निगाहें,
फिर उन लम्हों की आस करती है !
जो वापस जी नहीं सकते,
उस ज़िन्दगी की प्यास करती है !
कुछ यूँ वो लम्हें याद आते हैं…

-श्रेया आनंद
(25th Aug 2013)

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