दीवाने हम भी हैं !

आँखों में सिमटी शर्म-ओ-हया के,
दीवाने हम भी हैं !

रग-रग में बस्ती शोख अदा के,
अफ़साने हम भी हैं !

शमा को पाने की आग में जलते,
परवाने हम भी हैं !

होगी मुकम्मल जिंदगी मेरी,
एक तुम्हे पाने से मगर,
तेरी एक हँसी के लिए,
हर ख़ुशी कुर्बान करने वाले,
दीवाने हम ही हैं !

– श्रेया आनंद
(8th June 2013)

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