एक पल की सिहरन!

नजरो से अपनी, नजरों को छुआ,
असर कुछ ऐसा हुआ,
सासें रुकीं,
रूह सिहर गई !

उस एक पल की सिहरन ने,
ख़ामोशी के दायरे से,
हाल-ए-दिल बयां किया !
हौले से इशारों में,
झुकती हुई पलकों ने,
चाहत का हर राज खोल दिया !

– श्रेया आनंद
(13th August 2009)

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