ममता की मौत

कर दिया बर्बाद जिसको ममता की मौत ने
उस अभागे का न पोछा किसी ने भींगे नयन
अमन का घोसला था माँ की गोद में
शाख वो तोड़ दी दरिंदों ने
मुझको बताओ ये मेरे यारों
क्या खता की थी इस परिंदे ने
ठोकरें खता बढ़ा मैं जिंदगी के राह पे
राह थे पथरिले , आये अनेकों ठोकरें
ठोकरों से लड़ लड़ कर बन गए जख्म नासूर
इस नासूर को भी फोड़ डाला बताओ क्या था मेरा कसूर
यह सवाल सिर्फ आनंद का नहीं सारा संसार देखिये
आज की दुनिया में जख्मी देखते तो हर कोई हैं
अगर महरम मांगिये तो खुद उनका बुखार देखिये

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