तु कविताएँ लिख; मेरे मर्तबान पे

तु कविताएँ लिख़; मेरे मर्तबान पे
सौदा हो जाएगा; तेरे दुकान का
घड़घड़ाहट भी हो; तो कोई परवा नहीं
रंग छाएगा तुझपे; बेज़ुबान का

मौत आएगी तेरी; किसी बात पर
लौट आएगा तु भी; किसी बात पर
गड़गड़ाहट भी हो; तो कोई परवा नहीं
ढ़ंग आएगा तुझको; किसी काम का
सौदा हो जाएगा; तेरे दुकान का..

बाजूओं का तु जिम्मा; उठा ले अभी
आरज़ुओं का तु कीमा; कटा ले अभी
सनसनाहट भी हो; तो कोई परवा नहीं
अंग, आएगा तेरे; भी मुक़ाम का
सौदा हो जाएगा; तेरे दुकान का..

अपने पैरो पे हो जा; खड़ा तु अभी
देने वाले से हो जा; बड़ा तु अभी
झनझनाहट भी हो; तो कोई परवा नहीं
संग आएगा तेरे; नाम अहेसान का
सौदा हो जाएगा, तेरे दुकान का..

रचनाकार/कवि~ डॉ. रविपाल भारशंकर

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