ग़ज़ल।।फ़िक्र।।

।।फिक्र।।

हो गया हूँ फ़िक्र से बर्बाद मैं तेरे ।।
नाम भी आया नही फरियाद में तेरे ।।1।।

अब दिलो के टूटने से दर्द क्या होगा ।।
जो मिला है अचानक बात में तेरे।।2।।

फर्क न पड़ता अगर तुम साथ न होते ।।
रूह भी कपने लगी अब याद से तेरे ।।3।।

दिल को रौंदा है नही फिर टूटता क्यों जा रहा ।।
अब क्या नयापन आ गया अनुबाद में तेरे ।।4।।

मिट गया होता कभी का फक्र से बेदम ।।
हू अभी जिन्दा उसी सौगात में तेरे ।।5।।

कर यकी न रह सकोगे अकेले तुम ।।
साथ होंगे सब बड़ी तादात में तेरे ।।6।।

न रहूँ मै न सही पर तुम रहोगे खुश ।।
क्या करु मै बेवजह बारात में तेरे ।।7।।

इल्म होता है नही अब ख़ुदा व खुद पे।।
गम रहेगा अश्क को बरसात में तेरे ।।8।।

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