मनोविनोद

क्या कहे जमाने के हाल यंहा पर
खुदा की खुदाई हमने अजीब देखी
रहता है जो हाल ऐ सूरत से नबाबी
दिल-आदत से हालत फटीचर देखी

कड़ा है जो कठोर कैकटस की तरह
ख़ास खुदा ने उसे खुशनसीबी बख्शी
दिखने में लगे है वो सुहाना खूबसूरत
भाग्य से सूरत नरम गुलाब सी देखी

लगे सो सूरत और सीरत से भला
लोमड़ी से तेज़ चालकी उसमे देखी
देह से तो दिखे फकत लकड़ी जैसा
तेवरों में उसके गर्मी अजीब देखी

तबियत से हुआ डील डौल बेसुमार
खुराक उसकी मात्र चूहे जैसी देखी
बौनों की तो बात ही यंहा क्या कहिये
देह से दोगुनी तफ़सील जमीं नीचे देखी

गाय की खाल में भेड़िये रहते यंहा
गधो पे लिपटी शेर की खाल देखी
पहचान क्या करोगे “धर्म ” किसी की
इंसानियत के मुखोटे हैवानियत देखी

डी. के. निवातियाँ__________!!!

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