उम्र भर हम सिर्फ धोखा खायेंगें-गजल-शिवचरण दास

उम्र भर हम सिर्फ धोखा खायेगें
फिर भी खुद को बदल न पायेगें.

दोस्त सब दुशमन हुए तो क्या हुआ
हम तो सबको अपने गले लगायेंगें .

जिसका हमने हरदम यकीन किया
क्या पता था आइना दिखलायेगें.

रोज खुश्बू की तरहा आते हैं वो
रोज खुश्बू की तरहा वो जायेगें.

इन बुतों को क्या करें सजदा भला
एक दिन बुत हम यहां बन जायेगें.

दुशमनी का चलन गर छोड दे तो
हर चमन मे फूल ही खिल जायेगें.

ये जमाना जीत ही जायेगा बेशक
हम अगर मन से ही हार जायेगें.

बेवजह आग से खेलो नहीं कभी
जिस्म सारे आग मे जल जायेगें.

दास ये किस जुर्म की है सजा
पास रहकर भी नहीं मिल पायेगें.

शिवचरण दास

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