एक ही तो है

निशानी तो है
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जो भी नाम लो
ब्रम्ह एक ही तो है
जहाँ भी जाओ
ठिकाना एक ही है
जीने का ढंग
भले भिन्न क्यूं ना हो
ज्यान है एक
राश्तें में भेद भी हो
मुकाम एक
सासें चलते तक
जो भी करें तू
करें सबके लिये
निशानी तो है
मिटाए काले धब्बा
दिखाए अच्छें राश्ता |३|

नाम :राम शरण महर्जन
जन्मतिथि :३० दिसम्वर १९६६
निवास: कीर्तिपुर-१७, काठमांडू,

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