एक तरफ महल तो दूसरी तरफ झोपड़ियां क्यों दिखती हैं ?

एक तरफ महल तो दूसरी तरफ झोपड़ियां क्यों दिखती हैं ?
एक ही शहर में चमचमाती चौड़ी सड़कें ,
तो कुछ ही दूरी पे संकीर्ण गलियां क्यों दिखती हैं ?
इंसान तो कुदरत ने एक सा बनाया फिर लोगों के दरमियान
ये दूरियां क्यों दिखती हैं ?
कुछ न कुछ तो पैमाने में खामियां आनंद की नजर में है यारो ,
वरना हकीकत में ये कमियां क्यों दिखती हैं ?
द्वारा
अभय कुमार आनंद
ग्राम – बिष्णुपुर
पत्रालय -पकड़िया
थाना – शंभूगंज
जिला – बांका
बिहार

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