यूं दिलों में ताजगी आ जाये-गजल-शिवचरण दास

यूं दिलों में ताजगी आ जाये काश
कि लबों पर रागिनी आ जाये काश.

चाहते हैं पाना जिसे हर हाल में
जिन्दगी में वो खुशी आ जाये काश.

तीरगी मे कैद जिनकी जिन्दगी सजा
उनके घर भी चांदनी आ जाये काश.

हो गई हैं सब दवाऍं बेअसर अगर
तो दुआ ए जिन्दगी आ जाये काश.

वो अभी मासूम है कह भी सकता नहीं
रोते बच्चे को अब हंसी आ जाये काश.

कोई भी रोता मिले तो दर्द सीनें में मेरे
और आंखों मे नमी आ जाये काश.

टूट्कर दरख्त गिरा सारे परिन्दे उड गये
फिर से उनकी वाहिनी आ जाये काश.

दास इतनी है दुआ मेरी ए परवरदिगार
सारी दुनियां मे अमन आ जाये काश.

शिवचरण दास

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