मेरी किस्मत की यात्रा

मेरी किस्मत की यात्रा
मैंने अपनी किस्मत को,
चौराहे पर छोड़ दिया |
आगे बढ़ा,
हो रही थी मैराथन,
मैं भी उसमे दौड़ लिया |
वाह रे, मेरी किस्मत देखो,
सबको पीछे छोड़ दिया |
बांह पसारे इज़्ज़त-शोहरत
खड़ी थी मेरे स्वागत को,
तब से लेकर आज तलक मैं
पीछे मुड़ना छोड़ दिया |
आलम की हिकमत को देखो
खुद किस्मत ने साथ दिया |