दिल को दस्तक

दिल को दस्तक

सब को छोडकर चला आया
सब देखते रहे गये
कितनी मासूम अपनी शाया
जब भी है वो मेरे साथ
दायें-बायें हर जगह
कभी कभी मेरी अंदर
समा जाती वो
चुपचाप रहती दिल में
सिर्फ दस्तक देना है
कितनी चंचल ख़ुशी होती
बात करती,
दिल की बात सुनती वो
एकांत भी कितनी प्यारी
कोलाहल को पीछे छोड़ना
दिल को है सकून बड़ा |

2 Comments

  1. rakesh kumar rakesh kumar 19/12/2014
    • Ram Sharan Maharjan 21/12/2014

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