मत रोको मुझे अब जाने भी दो,,

मैखाने मे आकर पैमाने को हाथ मे लिये
बैठा हुआ हु मै ना जाने कब से
जिन्दगी बोझ सी लगने लगी अब यारो
कोइ तो दुआ मे मौत माग लो मेरे लिये रब से
बात अब उसकि बेवफाइ कि नही ये
अब है मेरे बेवफाइ कि कसम से
डर उसका नही बस इस बात का है
कही गीर ना जाउ मै उसके नजर से
हा यारो वो तो वफा कि मुरत थी
पुजा उसने मुझे अपने दिल जिगर से
कोशिश भी ना की मै ने उसे चाहने कि
जीतना सागर को प्यार है उसकी लहर से
बस इतनी ख्वाइश है कि आन्सु बहा लु
थोडी मिट्टी उठा लु उसकि कबर से
मत रोको मुझे अब जाने भी दो
उसके यादो को लेकर इस शहर से

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