मेरा स्कूल

मेरी कॉपी के पन्ने लाल हो गए हैं…
मेरे दोस्तों के ठहाके चीख़ों में तब्दील हो गए हैं…
आज मेरे स्कूल की घंटी नहीं बज रही है…
आज मेरे स्कूल में गोलियाँ बरस रही हैं…

क्यों मेरी कुर्सी और मेज़ बिखरे पड़े हैं
क्यों मेरी शर्ट पर ख़ून के छापे बड़े हैं
आज मेरा दोस्त मुझसे टिफ़िन नहीं बाँट रहा है…
आज क्यों मेरा टीचर मुझे नहीं डॉंट रहा है….
आज मेरे स्कूल की घंटी नहीं बज रही है…
आज मेरे स्कूल में गोलियाँ बरस रही हैं…

मैं अाज अनगिनत यारों की क़ब्र पर मिट्टी डाल कर आया हूँ…
मैं ख़ुद अपने हाथों से अपने बचपन को दफ़ना कर आया हूँ…
आज मेरे स्कूल की घंटी नहीं बज रही है…
आज मेरे स्कूल में गोलियाँ बरस रही हैं…

गरीमा मिश्रा

2 Comments

  1. nisha 28/01/2016
  2. Garima Mishra 17/03/2017

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