कविता कहानी से क्या होगा हासिल

रोज दिन हर पल नई नई कविताएं लिखी जा रही हैं। विश्व की तमाम भाषाओं में कविता लिखी जा रही है। जिस रफ्तार से कविताएं लिखी जा रही हैं क्या पाठक उसी तेजी से बढ़ रहे हैं। सवाल यह भी है कि क्या पाठकों को रोज लिखी जा रही कविताओं से कोई जीवन दृष्टि मिलती है? क्या कविता पढ़ने से कोई मूल्यपरक बदलाव घटित होता है? आदि ऐसे सवाल हैं जिन पर सोचने की आवश्यकता है।
कुछ भी लिखना कविता नहीं मानी जा सकती। कुछ माने गद्यपरक कविता या तुकमुक्त पंक्तियां कविता की श्रेणी में रखी जाएं। क्या कविता से जीवन-दर्शन प्रभावित होता है? क्या कविता हमें एक संवेदनशील मनुष्य बनने में मदद करती है? यदि ऐसा नहीं करती तो उस कविता का क्या लाभ।
कविता हो या लेख या फिर उपन्याय यदि कोई कलम चलाता है तो उससे पहले लिखने की आवश्यकता या उद्देश्य पर विचार करना चाहिए। वरना लिखे हुए शब्द की सत्ता एवं ताकत कमजोर होती है। अनावश्यक शब्द खरचना दरअसल शब्दों के साथ अन्याय है। अन्याय से कहीं बढ़कर शब्दों को जाया करना है।
लिखने से पहले लेखक को कई बार सोचना चाहिए कि क्रूा उनके लेखन से समाज पर कोई असर पढ़ने वाला है? क्या उस लेखन से किसी की जिंदगी बच सकती है? या उनके लेखन को किसी की अंधकारमय जीवन में थोड़ी सी रोशनी आ सकती है? यदि इन सवालों का उत्तर मिलता है तो जरूर लिखना चाहिए।
आज की तारीख में हजारों लाखों की तदाद में कविता, कहानी उपन्यास आदि साहित्य की तमाम विधाओं में लिखी जा रही हैं। इतनी लिखी जा रही हैं कि जिन्हें देख कर लगता है कि यह कहना कितना गलत है कि आज पाठक नहीं रहे। यदि पाठक नहीं हैं तो इतनी किताबें क्यों और कौन छाप रहा है। उससे बड़ा सवाल यह कि कोई लिख क्यों रहा है।
साइबर स्पेस और आभासीय दुनिया में इतनी सारी चीजें हैं कि उनमें से पढ़ने के लिए वक्त निकालना एक बहुत बड़ी समस्या है। यदि हमने समय निकाल भी लिया तो कैसे तय करें कि कौन सी किताब पढ़ने योग्य है। कविता पढ़ें या कहानी या फिर लंबी काया वाले किसी उपन्यास को हाथ लगाएं।

Leave a Reply