‘गाते प्रण लेते ‘


पेड़ परोपकारी ,
तुलसी का पेड़ ,
बन प्रहरी ,
प्रण लेते हैं |
धारा बदन पर ,
तरु की डालियाँ ,
मोहक रूप पर ,
कितना देते आम !
फल- फूल सुगंध ,
तुलसी का पेड़ ,
गाते रहते हैं ,
गाते प्रण लेते हैं ||

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