मीडिया की पत्रकारिता या मूर्खता पूर्ण व्यंग !

दोस्तों, यदि ये सिडनी वाली घटना भारत में
होती, तो भारतीय
मीडिया का क्या रवैया होता-
NDTV – रवीश, जैसा कि आप तस्वीरों में देख
पा रहे हैं, कहीं न कहीं ये है वो रास्ता जहाँ से
सुरक्षा बल कैफे में घुसकर आतंकी को पकड़ने
की सोच रहे हैं।
(रवीश पहले तस्वीरों के साथ साथ इस खबर
को ट्वीट करते हैं, जिसे वो आतंकी “फेवरेट” करने
के बाद रिप्लाइ मे “ओके” लिखता है।)
अब रवीश का सवाल – मनोरंजन, क्या उस
आतंकी की जाति का खुलासा हो पाया है
अबतक ?
मनोरंजन – जी नहीं रवीश, आतंकी अल्पसंख्यक
समुदाय का है और कहीं न
कहीं लोगों का मानना है कि वो ISIS का है।
रवीश – जी मनोरंजन, आतंक का कोई धर्म
नहीं होता, चलिए बने रहिए हमारे साथ, तब तक
कहीं न कहीं किसी और खबर के लिए कहीं और
का रूख करते हैं।
AajTak (सबसे तेज) – जी अंजना, कहीं न
कहीं यहाँ हेलीकॉप्टर भी पहुंच चुका है,
बताया जा रहा है कि इसमें स्पेशल कमांडो बैठे
हुए हैं, जो कैफे के पीछे के रास्ते से होकर कहीं न
कहीं अन्दर जाने की तैयारी में हैं ।
ABP News – जी नेहा, बहरहाल हम
आपको दिखा पा रहे हैं वो गेट जहाँ से
आतंकी “कहीं न कहीं” कैफे में घुसा। सुरक्षा के
तगड़े इंतजामात के बावजूद इतनी बड़ीचूक “कहीं न
कहीं” सिस्टम को कटघरे में जरूर खड़ा करती है।
नेहा पन्त- जी चमन, बहुत बहुत शुक्रिया तमाम
जानकारी के लिए, अब रूख करते हैं, स्टूडियो में
कहीं न कहीं बैठे मेरे वरिष्ठ सहयोगी विजय
विद्रोही का, विजय क्या लगताहै, कहीं न
कहीं कौन हो सकता है इस वारदात के पीछे?
विजय- मुझे लगता है कहीं न कहीं इस वारदात
को 2017 के उत्तर प्रदेश
विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर
पोलराइज करने के लिए अंजाम दिया गया है,
क्योंकि कहीं ना कहीं पिछले छः महीने के
दौरान ऐसा इल्म होना शुरू हो गया है
कि वर्तमान सरकार अल्पसंख्यक विरोधी है….
ब्ला ब्ला ब्ला कहीं न कहीं ब्ला..
ब्ला Continuously ब्ला ब्ला ब्ला कहीं न
कहीं ब्ला ब्ला ब्ला ब्ला
दर्शक- @&₹%&₹%#…. बेटा सोनू, ये
लो रिमोट, कार्टून लगा लो।

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