आँख फोड़ देंगे हम।

हमको न इतना सरल कोई समझो जी,
बहती हवाओं के भी रुख मोड़ देंगे हम।
आन बान शान पे जो भारती की आँच आयी,
तब तो जवाब फिर मुँह तोड़ देंगे हम।
जान भी गंवानी पड़े पीछे न हटेंगे कभी,
जिंदगानी जीने का भरम छोड़ देंगे हम।
दुनिया समूची कान खोलकर सुन ले ये,
देश पे उठेगी वह आँख फोड़ देंगे हम।।

——कवि सुनीत बाजपेयी ।

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  1. कवि सुनीत बाजपेयी 18/12/2014