गीत -नजर से तेरी कत्ल दिल का हुआ है |

नजर से तेरी कत्ल दिल का हुआ है |
तुम्ही पूंछती हो मुझे क्या हुआ है ?

न बर्बाद करके तसल्ली तुझे है |
सजा मौत की दे रही तू मुझे है ||
हुई बेवफा बेरहम बेशरम तू |
प्रणय की दिवाली के दीपक बुझे है ||
यही कह रहा है तडपता हुआ दिल |
निगाहों का खंजर जिगर छुआ है ||

नजर प्यार प्यारा बना है दुधारा |
कटा इश्क का मेरा कमसिन सितारा ||
जनाजा बनी है मुहब्बत हमारी |
नजर में गिराकर नजर से ही मारा ||
नजर में असर या नजर में जहर था ?
जनाज़ा जला और छाया धुंआ है ||

जिगर पीर अन्दर समन्दर बनी है |
मेरी मौत से जंग कैसी ठनी है ?
न जी पा रहा हूँ न मैं मर रहा हूँ |
तडपता हूँ मैं पीर कितनी घनी है ||
ये कैसी तबाही मेरी जिन्दगी में |
डगर में खाई औ पीछे कुआं है ||

दिखा कर हसीं ख़्वाब दिल तूने तोडा |
दीवाना बना करके मुझको है छोड़ा ||
प्रणय वन में जो पौध गुल की उगी थी |
प्रिये तुमने उसको है जड से मरोड़ा ||
मिले तुझको जन्नत की खुशियाँ यहीं पर |
सलामत रहे तू ये मेरी दुआ है ||

आचार्य शिवप्रकाश अवस्थी
9412224548

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