“संयोग” ( अंश तीन )

“संयोग” ( अंश तीन )

{{ पुष्प }}

एक पौधे पर पुष्प खिले अनेक
एक ही माली द्वारा संजोया गया !

कुछ टूट कर बिखर गए जमीन पर
किसी के हाथो मसल दिया गया !

कोई गुलदान में घर की शोभा बढ़ाये
किसी को श्रृंगार में सजाया गया !

कुछ बने प्रतिष्ठित हार गले का,
कोई हवन कुण्ड में चढ़ाया गया !

कोई हुआ अर्पित श्री चरणो में
कुछ को पूजा में संजोया गया !

सुशोभित कोई हुआ शैया पर वीरो की
कोई कबगाह का शरताज बना !

“संयोग” था क्या उस पुष्प का
जो संवारा गया पवित्र हाथो से,
पूजा की थाली में रखा गया
कर अभिषेक मंत्रोच्चारण से
किसी देव मूर्ति के गले का हार बना !!

डी. के. निवातियाँ _____!!!

4 Comments

    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/03/2015
  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari"Indwar" 24/08/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/08/2015

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