‘जनम सफल कीजिए’

बात बनने को हो, तो उसे बना लीजिए।
जिन्दगी खुशनुमा हो,इसे सज सजा दीजिए॥
जिन्हें प्रभु के प्यार की, हो चाहत तो लीजिए।
तू उन देवताओं की, दीदार दिल से कीजिए॥
कहते है लोग शंकर,को दिल में बसा लीजिए।
पार्वती जगत जननी,सुखद जीवन सजा दीजिए॥
शिल्पी मन मंगल में नग,निखार लायो जानिए।
मंगल मूर्ति महिमा ज्यौं,महान हुई जानिए॥
बंदनीय सो मूर्ति,जपते जगते नક્ષत्र ए।
पूज्यनीय हैं मूर्ति, कहते हैं लोग ईश्वर॥
हृदय तन बसा लो,गुह्य गेह જ્ઞાन जानिए।
बहुत दर्द सहा उसने,इस लिए वह है ईश्वर॥
घृनी જ્ઞાन महालક્ષ્मी,पार्वती-सीता जानिए।
सिय सेवक हनुमान,कलिकाल प्रत्यક્ષ मानिए॥
हनुमत चरण शरण में,मान सम्मान लीजिए।
मुखड़े नहीं જ્ઞાन में,तू मान ध्यान कीजिए॥
परोपकार प्रेम प्रभु,सत्व निर्विकार मानिए।
राम नाम मुक्ति धाम,तन शरण चरण जानिए॥
राम शिव और ब्रह्मा, में मत भेद न मानिए।
जनम सफल मानुष तन,रघुपति गीत गायिए॥
शव्दार्थ:-घृनी-घृनी,दयालु।

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