दिवाली के जश्न

एक तरफ धूम थी,दिखती थी आतिशबाजियां
दूजी तरफ गम था ,गिरती थी आँसूओ की बुँदिया ,
कोई खुश था दिवाली के जश्न मेँ ,
कहीं ख़तम हो रही थी खुशियां ।
जो रॉकेट छोड़े खुश रहने वालो ने ,उसने
आग लगा दी भूखों मरने वालो की झोपड़ियाँ ,
खूब बुरा जश्न मना उनके घर चिताओं की
और बाहर जल रही थी रंग बिरंगी फुलझड़ियाँ ।

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  1. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 15/07/2017

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