बस तेरी ही गुणगान करुँ ( प्रार्थना )

बस तेरी ही गुणगान करुँ ( प्रार्थना )

सत मार्ग चलना पथ हो मेरा,
सुबह शाम तुझे याद करू,
इतनी मुझको बुद्धि दो भगवन
बस तेरा ही गुणगान करुँ.———–!! १ !!

भूले से भी न बुरा हो किसी का,
सबका मै सम्मान करू,
मुझ पे इतनी कृपा करना,
कभी खुद पे न अभिमान करुँ.

इतनी मुझको बुद्धि दो भगवन
बस तेरा ही गुणगान करुँ.———-!! २ !!

तुम ही मेरे रक्षक, तुम दुःखहर्ता,
ताउम्र तुम ही से प्रीत करुँ
सुख का हो या मौसम दुःख का
हर दशा तेरे दर शीश धरुँ

इतनी मुझको बुद्धि दो भगवन
बस तेरा ही गुणगान करुँ.———!! ३ !!

दानी तुम हो निर्धन मैं हु,
मुझ पर तुम उपकार करो
मुझमें इतनी शक्ति भर दो
निडर होकर सत्मार्ग चलूँ

इतनी मुझको बुद्धि दो भगवन
बस तेरा ही गुणगान करुँ.———-!! ४ !!

हर कदम पर अंधकार का पहरा
कैसे मन मंदिर रोशन करू
मझधार में रहती पल-२ नैया
किस विद इसको पार करू

इतनी मुझको बुद्धि दो भगवन
बस तेरा ही गुणगान करुँ.———-!! ५ !!

सत मार्ग चलना पथ हो मेरा,
सुबह शाम तुझे याद करू,
इतनी मुझको बुद्धि दो भगवन
बस तेरा ही गुणगान करुँ.———–!! ६ !!

डी. के. निवातियाँ ________!!

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