मतलबी दुनियां

मतलबी दुनियां
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दिल की बात कौन सुनता ?
धोखाधड़ी की है ये ज़माना |१|

कौन अपना कौन पराया
फूँक-फूँक के अब चलना |२|

तरकीब करें तो जलता यहाँ
भीख मंगे हो तो सकून यहाँ|३|

घर से बेघर होता अपनो से
फिक्र तो सिर्फ अपने आप से |४|

जैसा सोचता आदमी बनाता वैसे ही
जैसा भरता आदमी पाता वो वैसे ही| ५|

राम शरण महर्जन
कीर्तिपुर, काठमांडू |

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