‘लौकिक नेत्रृत्व शैली’

लोकतान्त्रिक शैली को,सदा पક્ષधर भारत। अधीनस्थों की राय को सुन्दर स्वागत करता।। प्रशंसा करता सदा,उद्देश्य निर्धारित करता। लोकतान्त्रिक सत्ता ,विकेन्द्रीयकरण करता।। उन्नत उपलब्धियों के प्रयासों को प्रेरित करता। निर्गत-निर्मित वातावरण चूनौतीपूर्ण लिए रहता।। अनौपचारिक सम्वन्ध,मैत्रीपूर्ण मित्रता रखता। संवृद्धि प्रोत्साहित कर,जीत हृदय सबका लेता।। दिल को भाता भारत,डगर दिखाता भारत। मन हर्षाता भारत, राह दिखाता भारत।। कुत्ते भौक रहे डगर,मगर-सगर पर भारत।। कदम ताल नव भारत, लोकतान्त्रिक इभारत। जन जन प्यारा भारत,राष्ट्र दुलारा भारत।। नियन्त्रिण निर्वाध शैली,स्वयं लક્ષ્य निर्धारित करता। किए जाने पर निवेदन, निर्देश सलाह देता।। जोर देकर कराती निर्वाध शैली घोर-शोर रहती। शोर नियन्त्रितनिर्वाध शैली की सबको जन खटकती।। निरंकुश नेतृत्व तो, आदेश निर्देश देता। मानकर चलता वह,प्रयास किया जाएगा।। कार्य करने पर जोर,है देता सदा रहता। है पर्याप्त उसे इतना,करते कार्य अपना लोग।। काम का काम से सम्बन्ध,औपचारिक रखता सदा। निरंकुश शासक बन,मानो वन में विचरित यदा-कदा।।

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