यूं नजर से सलाम -गजल-

यूं नजर से सलाम करते हैं
काम सबका तमाम करते हैं

ये ना पूंछो हम तुम्हारे बिन
कैसे सुबह से शाम करते हैं.

जिन पै इल्जाम है सताने का
वो शिकायत भी आम करते हैं.

गरीबी में पले बढें है जो
खूब रोशन वो नाम करते हैं.

वक्त का क्या कट ही जायेगा
आप क्यूं मन खराब करते हैं.

लोग मरते हैं भुख से लेकिन
सुरमई वो अपनी शाम करते हैं.

हक मांगना अगर खिलाफत है
हम तो बस यह गुनाह करते हैं.

दास जिन्हें हक नही उठाने का
वो दाम लेकर सवाल करते हैं.

शिवचरन दास

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