चले आना…

II चले आना II

कभी होना न उदास तुम, सदा यो ही मुस्कुराना I
जब लगे तन्हाई का आलम पास मेरे चले आना II

बदला जाए जो रुख जमाने का, न तुम घबराना I
उठा के दो कदम सरे राह मेरे पते पर चले आना II

आती है मुश्किलें मंजिल-ऐ-जिंदगी की राहो मैं I
फांदकर हर बाधा जिंदगी का गुलशन सजाना II

न मिले सके खवाबो को मंजिल तो कोई बात नही I
रखना हौसले बुलंद, मंजिलो पर बढ़ते चले जाना II

मरने की बाद तो उठा लेता है कंधो पर ये ज़माना I
जीते जी मिले एक कन्धा काफी है तेरा चले आना II

अपनी होकर भी बेगानी सी लगने लगे जब दुनिया I
और ढूंढे दिल किसी अपने को, पास मेरे चले आना II

………………..डी. के. निवातियाँ