ग़ज़ल

तुम ही न मिलोगे तो क्या मिलेगा
मिलने को टी सारा ज़माना मिलेगा।

ये उम्मीदें मुद्दतों पुरानीहो गई हैं
न जाने तू कब और कैसा मिलेगा।

ऐ इश्क़ की गहराई हमें जवाब दे
इतना गिरा हु इंसान कहाँ मिलेगा।

किस मोड़ से किस मोड़ ताक आ गए
इसके आगे बस धुआं मिलेगा।

दिल मांगने से कुछ नहीं मिलता यहाँ
हाथ मांगो तो सारा ज़माना मिलेगा।
तुम ही न मिलेगो तो क्या मिलेगा।।

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