नहीं लगता के आऊँ अब

नहीं लगता के आऊँ अब किना सा तेरे दिल में
परेमे हुँ जो आता हुँ जरा सा तुझे मिलने
कोई कामल नहीं हुँ मै, सफा सा सोरज का
जसम-ए-दल तरसता हुँ, मरा सा तुझे मिलने

रचनाकार/कवि~ डॉ. रविपाल भारशंकर

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