आंख का पानी -गजल-शिवचरण दास

आंख का पानी अगर मर जायेगा यारो
जिन्दगी मे ही जहर भर जयेगा यारो.

जुर्म का शैतान हावी हो गया है इस कदर
अब खुदा भी देखकर डर जायेगा यारो.

मुश्किलो पर ध्यान रखेंगे सफर मे यदि
मन्जिलो का फासला बढ जायेगा यारो .

दोस्तों से गर तकाजा ही रहा अहसान का
फर्ज जीते जी यहां मर जायेगा यारो.

आदमी खुद से ही हरदम हारता है अन्त में
आज जो उठता है वो कल गिर जायेगा यारो.

दास दर्पण मे कोई अजनबी सा शख्श है
क्या पता था वक्त यूं छ्ल जायेगा यारो.

आंधियां कितने हि कर ले गुल चराग
एक बुझकर दूसरा जल जायेगा यारो.

शिवचरण दास

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